‘ज़ख़्मी बहन और रोता भाई’, क्या है इस वायरल वीडियो का सच?

सोशल मीडिया

बीते चार दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो 15 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है जिसे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का बताया जा रहा है और साथ ही दावा किया जा रहा है कि चार मुस्लिम युवकों ने एक हिंदू लड़की के रेप की कोशिश की जिसे उसके भाई ने लड़-भिड़कर बचा लिया.

इस वायरल वीडियो में एक घायल लड़का और लड़की दिखाई देते हैं जिनके चेहरे पर ख़ून लगा है और लड़का वीडियो बनाने वाले से मदद करने की गुज़ारिश करता है.

45 सेकेंड के इस वीडियो में लड़के को कहते सुना जा सकता है कि “हमारे घर पर हमला हुआ है और पुलिस रिपोर्ट नहीं लिख रही है.” इस वीडियो में ये घायल युवक कुछ मुस्लिम लोगों के नाम लेता है जिन पर वो हमला करने का आरोप लगा रहा है.

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हमने पाया कि अधिकांश जगह इस वीडियो के साथ एक जैसा संदेश लिखा गया है. ये संदेश है: “यह घटना लखनऊ के इटौंजा थाना क्षेत्र की है. शांति प्रिय क़ौम इस्लाम के चार-पाँच लोग जब इस लड़के की बहन का रेप करने आए तो विरोध करने पर उन्होंने दोनों को बुरी तरह पीटा.”

कई बड़े दक्षिणपंथी रुझान वाले ग्रुप्स में इस वीडियो #जागो_हिंदू_जागो और #हिंदुत्व_को_गाली जैसे हैशटैग्स के साथ शेयर किया जा रहा है.

हमने पाया कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो को धार्मिक एंगल देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बीबीसी ने अपनी पड़ताल में इन सभी दावों को ग़लत और लोगों को भड़काने वाला पाया.

यह बात सही है कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश के लखनऊ का है, लेकिन मारपीट की इस घटना के पीछे कोई धार्मिक एंगल नहीं था और न ही वायरल वीडियो में दिख रही पीड़िता ने रेप की शिकायत की है.

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वायरल वीडियो का सच

जैसा कि सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ दावा किया गया है कि ये घटना लखनऊ क्षेत्र में पड़ने वाले इटौंजा थाना क्षेत्र की है, इसलिए अपनी पड़ताल की शुरुआत हमने वहीं से की.

लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बीबीसी को बताया कि ये एक ही मोहल्ले के दो परिवारों के आपसी विवाद का मामला था. दोनों ही मुस्लिम परिवार हैं. दोनों परिवारों के बीच 24 जून 2019 को मारपीट हुई थी.

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उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार पर हमला करने के 4 नामजद अभियुक्तों (इस्लाम, उस्मान, शकील और यूनुस) को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

इस मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ धारा-308, 323, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

जाँच अधिकारी ने बताया कि ये घटना लखनऊ ज़िले के ‘बख़्शी का तालाब’ ब्लॉक में स्थित नरोसा गाँव की है, इटौंजा कस्बे की नहीं.

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वीडियो बनाया किसने था?

लखनऊ ज़िले के नरोसा गाँव में रहने वाले पीड़ित परिवार से बीबीसी ने वायरल वीडियो और मारपीट की उस घटना के बारे में बात की.

23 वर्षीय पीड़ित युवक पेशे से ड्राइवर हैं. उन्होंने बताया कि ये झगड़ा घर के सामने खेल रहे बच्चों की आपसी लड़ाई के बाद शुरु हुआ था. लेकिन कहासुनी से बात इतनी बिगड़ गई कि दोनों परिवारों के बीच मारपीट की नौबत आ गई.

उन्होंने कहा कि “घर के सामने रहने वाले इस्लाम के परिवार ने डंडे और सरिए से मुझपर और मेरे भाई पर हमला किया था. जब वो हमें मारने लगे तो मेरी बहन और बुआ ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इसके बाद उन्होंने उन्हें भी पीटा.”

वायरल वीडियो के बारे में उन्होंने कहा कि “जब मैं अपनी बहन को लेकर पुलिस चौकी पहुँचा तो पुलिस वालों ने मुझे थाने में जाकर एफ़आईआर लिखवाने को कहा. मैं उनसे मदद मांगता रहा. उसी दौरान चौकी पर मौजूद एक स्थानीय पत्रकार ने मेरा और मेरी बहन का वीडियो रिकॉर्ड किया था.”

पीड़िता

मारपीट की इस घटना में पीड़ित युवक की छोटी बहन को सबसे ज़्यादा चोट लगी थी.

16 वर्षीय पीड़िता ने बीबीसी को बताया कि उनके पड़ोसियों के साथ उनके परिवार का तनाव पुराना है और पहले भी दोनों परिवारों के बीच झगड़ा हो चुका है.

वो कहती हैं कि उन्हें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि बच्चों के बीच हुआ झगड़ा इतना गंभीर रूप ले लेगा.

पुलिस का कहना है कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में किसी पर भी रेप की कोशिश का आरोप नहीं लगाया है. पीड़िता ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की.

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source

Lalit Choudhary

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